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छत्तीसगढ़ में ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान को गति, 2 हजार करोड़ से अधिक खर्च; 30 प्रतिशत काम अभी बाकी

छत्तीसगढ़ में ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान को गति, 2 हजार करोड़ से अधिक खर्च; 30 प्रतिशत काम अभी बाकीरायपुर। छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण और भूजल स्तर सुधारने के लिए चलाए जा रहे ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान के तहत अब तक 1.03 लाख से अधिक जल संरक्षण कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इन कार्यों पर 2,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुका है। हालांकि, अभियान के तहत निर्धारित कार्यों में करीब 70 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है, जबकि लगभग 30 प्रतिशत कार्य अभी बाकी हैं। 11 लाख से अधिक ग्रामीणों को रोजगारयह अभियान 24 अप्रैल 2025 से शुरू किया गया था। इसके तहत जल संरक्षण के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत 1,03,651 स्थायी जल संरक्षण एवं संवर्धन परिसंपत्तियों के निर्माण का काम चल रहा है।अधिकारियों के अनुसार, इन कार्यों से प्रदेश में प्रतिदिन 11 लाख से अधिक ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है। इनमें करीब 57 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। आजीविका डबरियों और तालाबों पर जोरकमजोर वर्गों की निजी भूमि पर अब तक 13,065 आजीविका डबरियों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इनका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को मत्स्य पालन, बागवानी और अन्य आयवर्धक गतिविधियों से जोड़ना है।वहीं ‘नवा तरिया-आय के जरिया’ पहल के तहत 624 सामुदायिक तालाब विकसित किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण योजना के तहत बने 1.50 लाख से अधिक घरों में हितग्राहियों ने स्वेच्छा से वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी लगाए हैं। भूजल स्थिति में सुधारजल संरक्षण के प्रयासों का असर भूजल संसाधन आकलन-2026 में भी दिखाई दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश का कोई भी विकासखंड अब भूजल दोहन की ‘क्रिटिकल’ श्रेणी में नहीं है।वर्ष 2020 में प्रदेश के नौ विकासखंड और 2025 में पांच विकासखंड इस श्रेणी में थे। इस वर्ष बालोद का गुरूर, बेमेतरा के नवागढ़, बेमेतरा और बेरला तथा रायपुर का धरसींवा विकासखंड इस श्रेणी से बाहर आए हैं। कुल 12 विकासखंडों की भूजल स्थिति में सुधार हुआ है और सुरक्षित विकासखंडों की संख्या बढ़कर 127 हो गई है। 19 अर्ध-संकटग्रस्त विकासखंडों पर अब फोकसअब राज्य सरकार का ध्यान 11 जिलों के 19 अर्ध-संकटग्रस्त विकासखंडों पर है। इसके लिए ‘कैच द रेन’ योजना 2026-27 को विकासखंड स्तर पर मासिक लक्ष्यों के साथ लागू करने की तैयारी की जा रही है।प्रदेश में वार्षिक भूजल रिचार्ज क्षमता भी 11.57 बिलियन घन मीटर से बढ़कर 14.65 बिलियन घन मीटर हो गई है। वैज्ञानिक तरीके से होगी निगरानीजल संरक्षण कार्यों की योजना बनाने और उनके बेहतर क्रियान्वयन के लिए जीआईएस आधारित युक्तधारा प्लानिंग, सीएलएआरटी ऐप के जरिए स्थल चयन और वाटरशेड सिद्धांतों का इस्तेमाल किया जा रहा है। भूजल स्तर की नियमित निगरानी के लिए जलदूत प्रणाली लागू की गई है।वीबी-जी राम जी के आयुक्त तारण प्रकाश सिन्हा के अनुसार, अभियान के शेष कार्यों को जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। सार: ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान के जरिए छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के साथ ग्रामीण रोजगार और आजीविका को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। अब तक बड़े पैमाने पर काम पूरा होने के बावजूद करीब 30 प्रतिशत कार्य शेष हैं, जिन्हें पूरा करने पर सरकार का जोर है।

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