
बलरामपुर में शिक्षा व्यवस्था की अजीब तस्वीर: स्कूल में एक भी छात्र नहीं, फिर भी दो शिक्षक पदस्थ; 2022 में मंजूर हुए 11 लाख से भवन आज तक नहीं बनाबलरामपुर। जिले के विकासखंड बलरामपुर की ग्राम पंचायत बरदबंधा में सरकारी शिक्षा व्यवस्था की एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां संचालित शासकीय प्राथमिक शाला में इस सत्र में एक भी छात्र नहीं है, जबकि स्कूल में दो शिक्षक पदस्थ हैं। स्कूल भवन नहीं होने के कारण पिछले सत्र में पढ़ रहे तीन बच्चों ने भी दूसरे स्कूल में दाखिला ले लिया। 2022 में करीब 11 लाख रुपये हुए थे मंजूरबरदबंधा प्राथमिक शाला का पुराना भवन करीब तीन-चार साल पहले जर्जर होने के कारण तोड़ दिया गया था। इसके बाद नए भवन के निर्माण के लिए 2022 में करीब 11 लाख रुपये की मंजूरी दी गई थी। निर्माण सामग्री भी गांव तक पहुंची, लेकिन बाद में उसे वापस उठा लिया गया। इसके बाद भवन निर्माण का काम आगे नहीं बढ़ा और आज तक इसकी नींव तक नहीं खोदी गई। किचन शेड में लगती थी बच्चों की कक्षाभवन नहीं होने के कारण स्कूल में बच्चों की पढ़ाई मिड-डे मील बनाने वाले छोटे से किचन शेड में कराई जा रही थी। इसी जगह खाना बनाने और पढ़ाई दोनों का काम होता था। पिछले सत्र में स्कूल में कक्षा पहली के दो और कक्षा दूसरी का एक बच्चा, यानी कुल तीन विद्यार्थी पढ़ रहे थे। स्कूल की अव्यवस्था के चलते इन तीनों बच्चों के अभिभावकों ने उनका नाम कटवाकर दूसरे स्कूल में दाखिला करा दिया। अगस्त तक शिक्षक नए बच्चों के प्रवेश का इंतजार करते रहे, लेकिन कोई नया विद्यार्थी स्कूल में दाखिल नहीं हुआ। इस तरह वर्तमान सत्र में स्कूल पूरी तरह छात्रविहीन हो गया। दो शिक्षक पदस्थ, एक लंबे समय से अनुपस्थितस्कूल में एक प्रधान पाठक और एक शिक्षक समेत कुल दो शिक्षक पदस्थ हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इनमें से एक शिक्षक लंबे समय से स्कूल नहीं आ रहे हैं। मामले में विकासखंड शिक्षा अधिकारी संजू कनौजिया ने बताया कि संबंधित शिक्षक कैंसर से पीड़ित हैं और लंबे समय से अनुपस्थित हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि स्कूल भवन के लिए 2022 में स्वीकृति मिली थी, लेकिन निर्माण नहीं हो सका। शिक्षा विभाग के अनुसार प्रधान पाठक को प्राथमिक शाला धनेशपुर में अटैच किया जाएगा और शासन के निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों ने उठाए सवाल, जांच की मांगग्रामीणों का कहना है कि स्कूल भवन के निर्माण को लेकर कई बार अधिकारियों को जानकारी दी गई, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। उनका कहना है कि यदि समय पर भवन बन जाता तो गांव के बच्चों को दूसरे स्कूलों में जाने की जरूरत नहीं पड़ती।ग्रामीणों ने 2022 में स्वीकृत करीब 11 लाख रुपये की राशि और भवन निर्माण में हुई देरी की जांच कराने की मांग की है। साथ ही स्कूल भवन का जल्द निर्माण कराने की मांग भी प्रशासन से की गई है।












