बस्तर का जंगल बना आदिवासियों का ‘फूड बैंक’, वन उपज से भर रही पोषण की थाली
जगदलपुर। विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के अवसर पर बस्तर अंचल की एक अनूठी तस्वीर सामने आई है, जहां जंगल आदिवासी समुदायों के लिए प्राकृतिक ‘फूड बैंक’ की भूमिका निभा रहा है। यहां रहने वाले हजारों परिवार अपनी दैनिक खाद्य जरूरतों और पोषण के लिए जंगलों से मिलने वाली विभिन्न वन उपज पर निर्भर हैं।
बस्तर के जंगलों से महुआ, तेंदूपत्ता, चार, इमली, जंगली कंद-मूल, मशरूम, हरी पत्तेदार सब्जियां और कई प्रकार के फल प्राप्त होते हैं। ये वन उत्पाद न केवल आदिवासी परिवारों के भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, बल्कि उनके स्वास्थ्य और पोषण स्तर को बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों से मिलने वाले प्राकृतिक खाद्य पदार्थ पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और स्थानीय समुदायों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। यही कारण है कि बस्तर के आदिवासी समुदाय पीढ़ियों से जंगल और प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवनयापन कर रहे हैं।
वन संपदा पर आधारित यह परंपरा न केवल खाद्य सुरक्षा का मजबूत आधार है, बल्कि जैव विविधता संरक्षण और पारंपरिक ज्ञान को भी बढ़ावा देती है। बस्तर के जंगल आज भी हजारों परिवारों के लिए जीवन, आजीविका और पोषण का सबसे बड़ा सहारा बने हुए हैं।













