कोरबा। छत्तीसगढ़ स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (CSEB) प्रबंधन के खिलाफ गोढ़ी, बेंदरकोना और पड़रीपानी गांव के ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। अपनी वर्षों पुरानी मांगों को लेकर ग्रामीणों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। विरोध के चलते ग्रामीणों ने CSEB के राखड़ डैम (Ash Dam) को भी बंद करा दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना के लिए वर्ष 2007 में उनकी जमीनों का अधिग्रहण किया गया था। जमीन अधिग्रहण के दौरान रोजगार देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन करीब 19 वर्ष बीत जाने के बाद भी नियमित रोजगार नहीं मिल सका है। लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर ग्रामीण प्रबंधन और प्रशासन के समक्ष आवाज उठाते रहे हैं, लेकिन उनका आरोप है कि अब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया गया।
रोजगार की मांग को लेकर आर-पार की लड़ाई
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का आरोप है कि CSEB प्रबंधन उनकी मांगों की लगातार अनदेखी कर रहा है। ग्रामीणों ने प्रबंधन पर मनमानी रवैया अपनाने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जब परियोजना के लिए उनकी जमीन ली गई थी, तब रोजगार और अन्य अधिकारों को लेकर जो आश्वासन दिए गए थे, उन्हें पूरा किया जाना चाहिए।
ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी नियमित रोजगार की मांग पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
राखड़ डैम कराया बंद
आंदोलन के दौरान ग्रामीणों ने CSEB के राखड़ डैम को बंद करा दिया है। इससे प्लांट प्रबंधन के सामने भी स्थिति गंभीर हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी एक दिन का विरोध नहीं, बल्कि पिछले कई वर्षों से लंबित अधिकारों की लड़ाई है।
प्रशासन और प्रबंधन से कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन और प्लांट प्रबंधन से पूरे मामले में हस्तक्षेप कर उनकी मांगों का समाधान करने की मांग की है। उनका कहना है कि वर्ष 2007 में जमीन देने के बाद भी यदि आज तक रोजगार नहीं मिला है, तो यह उनके साथ अन्याय है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि नियमित रोजगार और उचित समाधान मिलने तक अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी। अब देखना होगा कि प्रशासन और CSEB प्रबंधन ग्रामीणों की मांगों पर क्या कदम उठाता है।











