बिलासपुर में सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच सुस्त, 15 एफआईआर के बाद भी फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार
बिलासपुर। सर्पदंश से मौत के नाम पर हुए बहुचर्चित मुआवजा घोटाले की जांच 15 एफआईआर दर्ज होने के बाद भी धीमी गति से चल रही है। पुलिस अब तक 20 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन फर्जी दस्तावेजों की फोरेंसिक रिपोर्ट लंबित होने और कानून-व्यवस्था व वीआईपी ड्यूटी में व्यस्तता के कारण जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है।
जांच के दौरान पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मर्ग इंटीमेशन और पटवारी प्रतिवेदन समेत कई दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं। इन दस्तावेजों के हस्ताक्षर और हस्तलेख की जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा गया है, जिसकी रिपोर्ट का पुलिस को इंतजार है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2023 से 2025 के बीच बिलासपुर में पदस्थ रहे तहसीलदारों और एक तत्कालीन एसडीएम की भूमिका भी जांच के दायरे में है। जांच में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें वास्तविक हितग्राही की अनुपस्थिति के बावजूद मुआवजे की राशि जारी कर दी गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कुछ थाना प्रभारी जांच को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को सौंपने की भी सिफारिश कर रहे हैं, हालांकि इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।













