सड़क हादसा मुआवजा मामले में बड़ा फैसला: बीमा कंपनी की दलील खारिज, मृतकों के परिजनों को 38 लाख रुपये देने का आदेश
बिलासपुर। सड़क दुर्घटना में मारे गए ससुर और दामाद के मामले में बिलासपुर के पंचम अपर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायाधिकरण ने बीमा कंपनी की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें दुर्घटना के लिए दोनों वाहनों के चालकों की लापरवाही का दावा किया गया था। अदालत ने मृतकों के परिजनों को कुल 38 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा देने का आदेश दिया।
मामला एक सड़क हादसे से जुड़ा है, जिसमें ससुर और दामाद की मौत हो गई थी। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि दुर्घटना में दोनों वाहनों के चालकों की समान रूप से गलती थी, इसलिए मुआवजे की राशि कम की जानी चाहिए। हालांकि, न्यायाधिकरण ने उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर इस दावे को स्वीकार नहीं किया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि केवल दो वाहनों की आमने-सामने टक्कर होने से यह नहीं माना जा सकता कि दोनों चालक समान रूप से दोषी थे। यदि बीमा कंपनी योगदानात्मक लापरवाही (Contributory Negligence) साबित नहीं कर पाती है, तो वह मुआवजा देने की जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।
न्यायाधिकरण ने मृतकों के आश्रितों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए करीब 38 लाख रुपये का मुआवजा और नियमानुसार ब्याज देने का निर्देश दिया है। इस फैसले को सड़क दुर्घटना मुआवजा मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है, जो भविष्य के मामलों में भी मिसाल बन सकता है।













