अबूझमाड़ की कृषि विरासत को मिलेगी वैश्विक पहचान, पीले-काले कोसरा और टीखुर को मिलेगा GI टैग
छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ क्षेत्र की पारंपरिक कृषि विरासत को जल्द ही वैश्विक पहचान मिलने जा रही है। राज्य सरकार ने अबूझमाड़ के पारंपरिक उत्पादों पीला कोसरा, काला कोसरा और टीखुर को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग दिलाने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
GI टैग मिलने के बाद इन उत्पादों की विशिष्ट पहचान स्थापित होगी और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनकी मांग बढ़ने की उम्मीद है। इससे स्थानीय किसानों और आदिवासी समुदायों को बेहतर कीमत मिलने के साथ उनकी आय में भी वृद्धि होगी।
अबूझमाड़ अपनी पारंपरिक खेती और जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यहां उगाए जाने वाले कोसरा और टीखुर लंबे समय से स्थानीय संस्कृति और खानपान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। GI टैग मिलने से इन उत्पादों की गुणवत्ता और मौलिकता को कानूनी संरक्षण भी मिलेगा।
राज्य सरकार का मानना है कि यह पहल आदिवासी कृषि परंपराओं के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।













