
नगर निगम कोरबा की अनोखी पहल! कचरे से बने ट्री गार्ड, प्लास्टिक का होगा पुन: उपयोग और महिलाओं को मिलेगा रोजगार
कोरबा। शहर में प्रतिदिन निकलने वाले प्लास्टिक कचरे को समस्या के बजाय संसाधन में बदलने की दिशा में नगर पालिक निगम कोरबा ने एक अभिनव पहल शुरू की है। निगम द्वारा रीसाइकिल प्लास्टिक का उपयोग कर ट्री गार्ड तैयार करवाए जा रहे हैं। इनके निर्माण की जिम्मेदारी महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को दी गई है।
इस पहल से एक साथ कई उद्देश्यों को साधने का प्रयास किया जा रहा है। इसमें प्लास्टिक कचरे का पुन: उपयोग, महिला समूहों को रोजगार उपलब्ध कराना, पौधों की सुरक्षा और शहर में हरियाली को बढ़ावा देना शामिल है।
प्लास्टिक से बनेगा पौधों का सुरक्षा कवच
नगर निगम की योजना है कि भविष्य में निगम क्षेत्र में जहां भी वृक्षारोपण किया जाएगा, वहां रीसाइकिल प्लास्टिक से तैयार इन ट्री गार्ड का उपयोग किया जाए। इससे नए लगाए गए पौधों को शुरुआती अवस्था में सुरक्षा मिलने के साथ प्लास्टिक कचरे के पुनर्चक्रण को भी बढ़ावा मिलेगा।
यदि ये ट्री गार्ड मजबूती और टिकाऊपन के मामले में सफल साबित होते हैं तो इस प्रयोग को बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है। खास बात यह है कि जिस प्लास्टिक को शहर के लिए कचरे की समस्या माना जाता है, उसी को पौधों की सुरक्षा के लिए उपयोगी बनाया जा रहा है।
महिला स्व-सहायता समूहों को रोजगार का अवसर
इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी है। ट्री गार्ड निर्माण को नियमित उत्पादन से जोड़े जाने पर समूह की महिलाओं के लिए आय का अतिरिक्त और स्थायी माध्यम विकसित हो सकता है।
कोरबा में महिला समूह पहले से ही ठोस कचरे के संग्रहण, पृथक्करण और उससे उपयोगी उत्पाद तैयार करने जैसी गतिविधियों में काम कर रहे हैं। ऐसे में रीसाइकिल प्लास्टिक से ट्री गार्ड निर्माण उनके लिए रोजगार का एक नया अवसर बन सकता है।
निगम के वृक्षारोपण स्थलों पर होगा उपयोग
नगर निगम की योजना के अनुसार भविष्य में वृक्षारोपण वाले स्थानों पर इन ट्री गार्ड का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे पौधों की सुरक्षा के साथ-साथ शहर के प्लास्टिक कचरे के बेहतर प्रबंधन को भी बढ़ावा मिलेगा।
आम नागरिकों को भी उपलब्ध कराने की संभावना
यदि रीसाइकिल प्लास्टिक से तैयार ट्री गार्ड मजबूत, टिकाऊ और लागत के लिहाज से उपयोगी साबित होते हैं, तो भविष्य में इन्हें निर्धारित शुल्क पर आम नागरिकों, संस्थाओं और सामाजिक संगठनों को भी उपलब्ध कराया जा सकता है।
इससे लोग अपने घर, संस्थान या अन्य स्थानों पर लगाए गए पौधों की सुरक्षा के लिए इन ट्री गार्ड का उपयोग कर सकेंगे। साथ ही महिला स्व-सहायता समूहों की आय बढ़ाने का अवसर भी पैदा होगा।
कीमत और मजबूती पर रहेगी नजर
इस पहल की सफलता केवल ट्री गार्ड तैयार होने से तय नहीं होगी। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि एक ट्री गार्ड तैयार करने में वास्तविक लागत कितनी आती है और इसकी कीमत पारंपरिक ट्री गार्ड के मुकाबले कितनी प्रतिस्पर्धी रहती है।
इसके अलावा बारिश, धूप और अन्य मौसमों में इसकी मजबूती और उपयोग की अवधि भी महत्वपूर्ण होगी। इन पहलुओं के आधार पर ही इसकी आर्थिक और पर्यावरणीय उपयोगिता का बेहतर आकलन किया जा सकेगा।
कचरे से हरियाली और रोजगार का मॉडल
प्लास्टिक कचरे को रीसाइकिल कर ट्री गार्ड तैयार करना, फिर उनका उपयोग पौधों की सुरक्षा के लिए करना—यह पहल कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को रोजगार से जोड़ने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो कोरबा में ‘कचरे से हरियाली और हरियाली से रोजगार’ का एक ऐसा मॉडल विकसित हो सकता है, जिसे भविष्य में दूसरे शहरों में भी अपनाया जा सकता है।













