Home / छत्तीसगढ़ / 40 साल में 10 हजार करोड़ रुपये के लोहा चोरी का दावा, विधायक ने डीजीपी से जांच की मांग उठाई रायपुर। प्रदेश में पिछले करीब 40 वर्षों के दौरान लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के लोहे की चोरी होने का दावा सामने आया है। इस मामले को लेकर विधायक ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से शिकायत कर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। विधायक का आरोप है कि लंबे समय से चल रही कथित चोरी और अनियमितताओं के कारण सरकारी एवं औद्योगिक संपत्तियों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। विधायक ने डीजीपी को दिए पत्र में कहा है कि विभिन्न स्थानों से लोहे और लोहे से संबंधित सामग्री के चोरी होने के मामलों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। उनका दावा है कि यदि पिछले चार दशक के दौरान हुई घटनाओं, जब्ती, परिवहन और संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जाए तो बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है। बड़े नेटवर्क की आशंका विधायक ने आशंका जताई है कि इतनी बड़ी राशि के लोहे की कथित चोरी किसी एक व्यक्ति या छोटे समूह के स्तर पर संभव नहीं है। इसके पीछे संगठित नेटवर्क की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने पुलिस से पुराने मामलों की फाइलें खंगालने, चोरी की रिपोर्ट, बरामदगी और संबंधित दस्तावेजों की जांच करने की मांग की है। पुराने रिकॉर्ड की जांच पर जोर शिकायत में पिछले कई वर्षों के दौरान दर्ज चोरी के मामलों के साथ-साथ कबाड़ और लोहे की खरीद-बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की मांग की गई है। विधायक का कहना है कि जांच में यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि चोरी का माल किन माध्यमों से खपाया गया और इसमें कौन-कौन लोग शामिल रहे। डीजीपी से निष्पक्ष जांच की मांग विधायक ने डीजीपी से पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष जांच या सक्षम एजेंसी के माध्यम से जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई और कथित आर्थिक नुकसान की वास्तविक राशि का आकलन कराने की मांग भी की गई है। हालांकि, 10 हजार करोड़ रुपये के चोरी के दावे की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। अब इस शिकायत पर पुलिस स्तर से क्या कार्रवाई होती है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं, इस पर नजर रहेगी।

40 साल में 10 हजार करोड़ रुपये के लोहा चोरी का दावा, विधायक ने डीजीपी से जांच की मांग उठाई रायपुर। प्रदेश में पिछले करीब 40 वर्षों के दौरान लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के लोहे की चोरी होने का दावा सामने आया है। इस मामले को लेकर विधायक ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से शिकायत कर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। विधायक का आरोप है कि लंबे समय से चल रही कथित चोरी और अनियमितताओं के कारण सरकारी एवं औद्योगिक संपत्तियों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। विधायक ने डीजीपी को दिए पत्र में कहा है कि विभिन्न स्थानों से लोहे और लोहे से संबंधित सामग्री के चोरी होने के मामलों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। उनका दावा है कि यदि पिछले चार दशक के दौरान हुई घटनाओं, जब्ती, परिवहन और संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जाए तो बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है। बड़े नेटवर्क की आशंका विधायक ने आशंका जताई है कि इतनी बड़ी राशि के लोहे की कथित चोरी किसी एक व्यक्ति या छोटे समूह के स्तर पर संभव नहीं है। इसके पीछे संगठित नेटवर्क की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने पुलिस से पुराने मामलों की फाइलें खंगालने, चोरी की रिपोर्ट, बरामदगी और संबंधित दस्तावेजों की जांच करने की मांग की है। पुराने रिकॉर्ड की जांच पर जोर शिकायत में पिछले कई वर्षों के दौरान दर्ज चोरी के मामलों के साथ-साथ कबाड़ और लोहे की खरीद-बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की मांग की गई है। विधायक का कहना है कि जांच में यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि चोरी का माल किन माध्यमों से खपाया गया और इसमें कौन-कौन लोग शामिल रहे। डीजीपी से निष्पक्ष जांच की मांग विधायक ने डीजीपी से पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष जांच या सक्षम एजेंसी के माध्यम से जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई और कथित आर्थिक नुकसान की वास्तविक राशि का आकलन कराने की मांग भी की गई है। हालांकि, 10 हजार करोड़ रुपये के चोरी के दावे की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। अब इस शिकायत पर पुलिस स्तर से क्या कार्रवाई होती है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं, इस पर नजर रहेगी।

40 साल में 10 हजार करोड़ रुपये के लोहा चोरी का दावा, विधायक ने डीजीपी से जांच की मांग उठाई

 

रायपुर। प्रदेश में पिछले करीब 40 वर्षों के दौरान लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के लोहे की चोरी होने का दावा सामने आया है। इस मामले को लेकर विधायक ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से शिकायत कर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। विधायक का आरोप है कि लंबे समय से चल रही कथित चोरी और अनियमितताओं के कारण सरकारी एवं औद्योगिक संपत्तियों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।

 

विधायक ने डीजीपी को दिए पत्र में कहा है कि विभिन्न स्थानों से लोहे और लोहे से संबंधित सामग्री के चोरी होने के मामलों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। उनका दावा है कि यदि पिछले चार दशक के दौरान हुई घटनाओं, जब्ती, परिवहन और संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जाए तो बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है।

 

बड़े नेटवर्क की आशंका

 

विधायक ने आशंका जताई है कि इतनी बड़ी राशि के लोहे की कथित चोरी किसी एक व्यक्ति या छोटे समूह के स्तर पर संभव नहीं है। इसके पीछे संगठित नेटवर्क की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने पुलिस से पुराने मामलों की फाइलें खंगालने, चोरी की रिपोर्ट, बरामदगी और संबंधित दस्तावेजों की जांच करने की मांग की है।

 

पुराने रिकॉर्ड की जांच पर जोर

 

शिकायत में पिछले कई वर्षों के दौरान दर्ज चोरी के मामलों के साथ-साथ कबाड़ और लोहे की खरीद-बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की मांग की गई है। विधायक का कहना है कि जांच में यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि चोरी का माल किन माध्यमों से खपाया गया और इसमें कौन-कौन लोग शामिल रहे।

 

डीजीपी से निष्पक्ष जांच की मांग

 

विधायक ने डीजीपी से पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष जांच या सक्षम एजेंसी के माध्यम से जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई और कथित आर्थिक नुकसान की वास्तविक राशि का आकलन कराने की मांग भी की गई है।

 

हालांकि, 10 हजार करोड़ रुपये के चोरी के दावे की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। अब इस शिकायत पर पुलिस स्तर से क्या कार्रवाई होती है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं, इस पर नजर रहेगी।

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