
छत्तीसगढ़ में सात महीने से बंद पड़ीं नौ मोबाइल फूड लैब, मिलावट की जांच के लिए 10 दिन का इंतजाररायपुर। छत्तीसगढ़ में खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच करने वाली नौ मोबाइल फूड लैब पिछले सात महीने से बंद पड़ी हैं। संचालन के लिए केंद्र सरकार से फंड नहीं मिलने के कारण इन गाड़ियों का उपयोग नहीं हो पा रहा है। इसका असर त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों की जांच पर पड़ रहा है। मोबाइल लैब के माध्यम से मौके पर लगभग 10 मिनट में प्रारंभिक जांच की जा सकती है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में नमूनों की रिपोर्ट के लिए करीब 10 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है।प्रदेश के विभिन्न जिलों में होती थी जांचछत्तीसगढ़ में नौ मोबाइल फूड लैब हैं, जो रायपुर सहित विभिन्न जिलों में पहुंचकर खाद्य पदार्थों की मौके पर जांच करती हैं। इनका उद्देश्य खाद्य सामग्री में मिलावट की आशंका की तत्काल पहचान करना और खाद्य सुरक्षा विभाग को कार्रवाई में मदद देना है।त्योहारों के दौरान मिठाई, खाद्य तेल, आटा, मैदा, सूजी और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में मिलावट की आशंका को देखते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) जांच अभियान चलाता है। लेकिन मोबाइल लैब बंद होने के कारण अधिकारियों को दुकानों से नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजने पड़ रहे हैं।एमओयू का नवीनीकरण नहीं होने से रुका फंडमोबाइल लैब के संचालन के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) का समय पर नवीनीकरण नहीं हो पाया था। इसके कारण भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने गाड़ियों के पेट्रोल और लैब स्टाफ के खर्च के लिए मिलने वाली राशि पर रोक लगा दी थी।रिपोर्ट के अनुसार, बाद में एमओयू के नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई, लेकिन इसके बावजूद संचालन के लिए आवश्यक फंड जारी नहीं हुआ। इसी वजह से नौ मोबाइल लैब का संचालन ठप है। इन गाड़ियों के ईंधन, कर्मचारियों और रखरखाव का खर्च केंद्र से मिलने वाली राशि पर निर्भर है।नमूनों की रिपोर्ट आने में लग रहे कई दिनमोबाइल लैब चालू रहने पर खाद्य पदार्थों की प्रारंभिक जांच मौके पर ही की जा सकती है। इससे संदिग्ध खाद्य सामग्री की पहचान करने और आगे की कार्रवाई में तेजी लाने में मदद मिलती है।वर्तमान में खाद्य सुरक्षा अधिकारी दुकानों से नमूने एकत्र कर प्रयोगशाला भेज रहे हैं। रिपोर्ट आने में कई दिन लगने के कारण मिलावट की पुष्टि और उसके बाद की कार्रवाई में देरी हो सकती है।त्योहारों को देखते हुए जांच अभियान जारीमोबाइल लैब बंद होने के बावजूद खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने खाद्य पदार्थों की जांच जारी रखी है। मिठाइयों और अन्य खाद्य सामग्री के साथ बाजारों में बिकने वाले कच्चे खाद्य पदार्थों के नमूने भी लिए जा रहे हैं।हाल ही में रायपुर की तीन बड़ी दुकानों से आटा, मैदा और सूजी के नमूने एकत्र किए गए थे। इसके अलावा खराब पाए गए कुछ खाद्य पदार्थों को नष्ट भी कराया गया।नौ मोबाइल लैब शुरू होने का इंतजारत्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों में मिलावट पर नियंत्रण रखना और लोगों को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना जरूरी है। ऐसे में नौ मोबाइल फूड लैब का सात महीने से बंद रहना जांच व्यवस्था के सामने चुनौती बना हुआ है।अब इन लैब को दोबारा शुरू करने के लिए आवश्यक फंड जारी होने का इंतजार है। यदि संचालन शुरू होता है, तो खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को मौके पर प्रारंभिक जांच करने में मदद मिलेगी और मिलावट के संदिग्ध मामलों में समय पर कार्रवाई करना आसान हो सकेगा।












