
बिलासपुर के ग्रामीण इलाकों में शुद्ध पेयजल का संकट, 14,217 नलकूपों पर नहीं लगे फ्लोराइड और आयरन रिमूवल प्लांटबिलासपुर | 20 अक्टूबर 2026बिलासपुर। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में 14,217 सफल नलकूप होने के बावजूद पानी से फ्लोराइड और आयरन जैसे तत्वों को हटाने के लिए एक भी फ्लोराइड रिमूवल प्लांट (FRP) या आयरन रिमूवल प्लांट (IRP) स्थापित नहीं किया गया है। इसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है।### 14,217 नलकूपों के पानी के शुद्धिकरण की व्यवस्था नहींविभागीय रिपोर्ट के मुताबिक, जिले के ग्रामीण इलाकों में स्थापित नलकूपों से गांवों की बस्तियों, स्कूलों, आंगनबाड़ियों और नल-जल योजनाओं के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जाती है। इसके बावजूद इन नलकूपों पर फ्लोराइड और आयरन हटाने के लिए आवश्यक शुद्धिकरण संयंत्रों की संख्या शून्य है।ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगह हैंडपंप और बोरवेल से लाल रंग का या खारा पानी निकलने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। पानी में आयरन और अन्य खनिज तत्वों की अधिकता होने की आशंका के बीच शुद्धिकरण की व्यवस्था नहीं होने से लोगों की चिंता बढ़ रही है।### 310 नल-जल योजनाओं में भी उपचार की सुविधा नहींरिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में नल-जल प्रदाय योजनाओं के अंतर्गत 216 पावर पंप संचालित हैं। वहीं, स्थल जल प्रदाय योजनाओं के तहत 94 पावर पंप काम कर रहे हैं। इस तरह कुल 310 पावर पंपों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति की जा रही है।इन योजनाओं के जरिए पानी टंकियों और पाइपलाइन के माध्यम से घरों तक पहुंचाया जाता है, लेकिन इनमें भी आयरन या फ्लोराइड हटाने के लिए कोई रिमूवल प्लांट स्थापित नहीं किया गया है। ऐसे में पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जल परीक्षण और आवश्यक शुद्धिकरण व्यवस्था की जरूरत महत्वपूर्ण हो जाती है।### स्कूलों और आंगनबाड़ियों में भी नहीं है रिमूवल प्लांटपेयजल की गुणवत्ता को लेकर सबसे अधिक चिंता बच्चों और मरीजों के इस्तेमाल वाले स्थानों पर है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, जिले के सरकारी स्कूलों में 1,857 हैंडपंप और पावर पंप, आंगनबाड़ियों में 1,140 तथा ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में 233 पंप स्थापित हैं।इन स्थानों पर भी फ्लोराइड और आयरन हटाने के लिए एफआरपी या आईआरपी यूनिट स्थापित नहीं होने की बात रिपोर्ट में सामने आई है। स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों, आंगनबाड़ियों में आने वाले छोटे बच्चों और स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंचने वाले मरीजों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना आवश्यक है।### जल गुणवत्ता की जांच और शुद्धिकरण व्यवस्था जरूरीपेयजल में फ्लोराइड या आयरन की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक होने पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। हालांकि, किसी विशेष नलकूप का पानी दूषित है या नहीं, इसकी पुष्टि जल परीक्षण के बाद ही की जा सकती है।ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के नलकूपों से लिए जाने वाले पानी की नियमित जांच, प्रभावित क्षेत्रों की पहचान और जरूरत के अनुसार जल शुद्धिकरण संयंत्रों की स्थापना महत्वपूर्ण है।जिले में हजारों नलकूपों और सैकड़ों पंपों के माध्यम से ग्रामीण आबादी को पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। अब मुख्य सवाल यह है कि लोगों को केवल पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ उसकी गुणवत्ता और शुद्धता बनाए रखने के लिए संबंधित विभाग क्या कदम उठाता है











