
बैसाखी के सहारे 30 साल से शिक्षा की अलख जगा रहे शिक्षक पलनी शेट्टी, 32 बच्चों का संवार रहे भविष्य
बीजापुर। शारीरिक दिव्यांगता को कमजोरी नहीं, बल्कि हौसले के साथ चुनौती देने वाले बीजापुर जिले के प्रधानाध्यापक पलनी शेट्टी आज शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरणा की मिसाल बने हुए हैं। एक पैर से दिव्यांग होने के बावजूद वे बीते 30 वर्षों से अधिक समय से लगातार बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं। वर्तमान में वे भोपालपटनम के ऐतिहासिक प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक के रूप में 32 बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं।
मौसम भी नहीं रोक पाया कदम
पलनी शेट्टी रोज बैसाखी के सहारे स्कूल पहुंचते हैं। बारिश, आंधी या अन्य मुश्किल परिस्थितियां भी उनके कर्तव्य के रास्ते में बाधा नहीं बन सकीं। पहले वे लूना स्कूटी से स्कूल जाते थे, जबकि अब ऑटोमैटिक कार से विद्यालय पहुंचते हैं और बैसाखी के सहारे कक्षा तक जाकर बच्चों को पढ़ाते हैं। उनका कहना है कि बच्चों को पढ़ाना केवल नौकरी नहीं, बल्कि उनकी जिम्मेदारी है।
पंचायत कर्मी से प्रधानाध्यापक तक का सफर
पलनी शेट्टी ने 1995-96 में पंचायत कर्मी के रूप में सेवा शुरू की थी। वर्ष 1998 में वे शिक्षाकर्मी वर्ग-3 बने। उनकी पहली पदस्थापना चिंतावागू नदी पार रामपेटा प्राथमिक स्कूल में हुई, जहां उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बीच साइकिल से पहुंचकर करीब तीन साल तक बच्चों को पढ़ाया।
इसके बाद उन्होंने उल्लूर प्राथमिक शाला और फिर वर्ष 2003 से करीब 20 वर्षों तक बालक आश्रम भोपालपटनम में सेवाएं दीं। वर्ष 2022-23 में उन्हें प्रधानाध्यापक पद पर पदोन्नति मिली। इसके बाद उन्हें भोपालपटनम के ऐतिहासिक प्राथमिक विद्यालय की जिम्मेदारी सौंपी गई।
32 बच्चों के लिए बने प्रेरणा
स्कूल के 32 बच्चों के लिए पलनी शेट्टी सिर्फ प्रधानाध्यापक नहीं, बल्कि संघर्ष और आत्मविश्वास की मिसाल हैं। वे नियमित रूप से कक्षाएं लेते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर व्यक्तिगत ध्यान देते हैं। उनके अनुशासन और संवेदनशील व्यवहार से विद्यार्थी भी प्रेरित होते हैं।
शिक्षक दिवस पर मिलेगा सम्मान
भोपालपटनम का यह प्राथमिक विद्यालय वर्ष 1891 में स्थापित हुआ था और इसे क्षेत्र के सबसे पुराने विद्यालयों में गिना जाता है। इसी ऐतिहासिक विद्यालय की जिम्मेदारी संभाल रहे पलनी शेट्टी का चयन प्रधानाध्यापक श्रेणी में मुख्यमंत्री अलंकरण पुरस्कार के लिए हुआ है। शिक्षक दिवस के अवसर पर जगदलपुर में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री के हाथों उन्हें सम्मानित किया जाएगा।
पलनी शेट्टी की कहानी बताती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, दृढ़ इच्छाशक्ति और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने वाला व्यक्ति दूसरों के जीवन में बदलाव ला सकता है।












