कोरबा के राताखार क्षेत्र में कथित अवैध रेत परिवहन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाया जा रहा है कि रेत के अवैध परिवहन में लगे ट्रैक्टरों को खनिज विभाग की कार्रवाई से पहले ही सूचना मिल जाती है, जिसके बाद मौके से वाहनों को हटा दिया जाता है।बताया जा रहा है कि जब खनिज विभाग के अधिकारी जांच या कार्रवाई के लिए राताखार क्षेत्र की ओर रवाना होते हैं, तो विभाग से जुड़े एक ड्राइवर द्वारा कथित तौर पर दीपक सिंह नामक व्यक्ति को फोन कर अधिकारियों के निकलने की जानकारी दी जाती है। आरोप है कि सूचना मिलते ही वहां मौजूद ट्रैक्टरों को तत्काल मौके से हटा दिया जाता है।इसके बाद जब खनिज विभाग की टीम मौके पर पहुंचती है, तो वहां कोई वाहन नहीं मिलता। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कार्रवाई से पहले ही संबंधित लोगों तक अधिकारियों के पहुंचने की सूचना कैसे पहुंच रही है?हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल अवैध रेत परिवहन पर कार्रवाई की व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि विभागीय स्तर पर संभावित सूचना लीक की भी गंभीर जांच की मांग करता है।अब देखना होगा कि खनिज विभाग कोरबा इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करता है या नहीं और यदि विभाग के किसी कर्मचारी की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।आखिर खनिज विभाग की कार्रवाई की सूचना पहले ही अवैध रेत परिवहन से जुड़े लोगों तक कैसे पहुंच रही है? क्या विभाग इस मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करेगा?













