
IGKV रायपुर के जर्जर हॉस्टलों से गिर रहा प्लास्टर, छात्रों की सुरक्षा पर संकट; 2000 सीटों के लिए सिर्फ 1400 बेडरायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) रायपुर में छात्रों की सुरक्षा और हॉस्टल सुविधा को लेकर गंभीर स्थिति सामने आई है। विश्वविद्यालय परिसर के कई पुराने हॉस्टल जर्जर हालत में हैं। इन भवनों से प्लास्टर और छज्जे गिरने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। वहीं, हॉस्टल में सीटों की कमी के कारण बड़ी संख्या में छात्रों को परिसर से बाहर रहना पड़ रहा है। 60 साल पुराने हॉस्टल, गिर रहा प्लास्टरविश्वविद्यालय परिसर के कई हॉस्टल 30 से 60 साल पुराने हैं। वर्ष 1960 में बना सत्यम हॉस्टल भी अब काफी जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है। करीब दो महीने पहले शिवम, सत्यम और मंदाकिनी हॉस्टल में प्लास्टर और छज्जे गिरने की घटनाएं सामने आई थीं। इनमें एक छात्र के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। घटनाओं के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन ने हॉस्टलों की जांच कराई थी। इसके बावजूद कई स्थानों पर मरम्मत का काम समय पर पूरा नहीं होने से छात्रों की चिंता बनी हुई है।50 लाख रुपये तक का फंड, फिर भी मरम्मत पर सवालहॉस्टलों और भवनों के रखरखाव के लिए विश्वविद्यालय में अलग व्यवस्था है। इसके लिए दो इंजीनियर, दो लिपिक और एक केयरटेकर तैनात हैं। जरूरत के अनुसार मरम्मत कार्यों पर 50 लाख रुपये तक खर्च करने की व्यवस्था बताई गई है।इसके बावजूद जर्जर भवनों की समय पर मरम्मत नहीं होने से व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। छात्रों का कहना है कि जर्जर हॉस्टलों में रहना उनके लिए सुरक्षा का गंभीर खतरा बन गया है। 2000 छात्रों के लिए सिर्फ 1400 हॉस्टल बेडIGKV के कृषि महाविद्यालय में करीब 2000 विद्यार्थियों के लिए अध्ययन की व्यवस्था है। इनमें लगभग 600 यूजी, 800 पीजी और 600 पीएचडी सीटें शामिल हैं।वहीं, विश्वविद्यालय परिसर के 14 हॉस्टलों में कुल 1400 विद्यार्थियों के रहने की क्षमता है। इनमें:6 बालिका हॉस्टल – 650 सीट8 बालक हॉस्टल – 750 सीटकुल – 1400 सीटइस तरह करीब 600 विद्यार्थी यानी लगभग 30 प्रतिशत छात्र हॉस्टल की सुविधा से वंचित रह जाते हैं। ऐसे छात्रों को शहर में पीजी या किराए के कमरे लेकर रहना पड़ता है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। छात्रों ने की हॉस्टल क्षमता बढ़ाने की मांगछात्रों ने जर्जर हॉस्टलों की जल्द मरम्मत कराने के साथ-साथ हॉस्टल की क्षमता बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि एक ओर पुराने भवनों में सुरक्षा का खतरा है, वहीं दूसरी ओर पर्याप्त हॉस्टल नहीं होने के कारण कई छात्रों को बाहर रहना पड़ रहा है।कुलपति ने कहा- सुरक्षा को लेकर जांच कराई गईIGKV के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल के अनुसार, हॉस्टलों में प्लास्टर गिरने की घटनाओं को गंभीरता से लिया गया है। सुरक्षा के मद्देनजर सभी हॉस्टलों की जांच कराई जा चुकी है और जिन हॉस्टलों में प्लास्टर गिरने या अन्य शिकायतें मिली हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कार्य कराया जा रहा है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 30 से 60 साल पुराने जर्जर हॉस्टलों में रह रहे छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मरम्मत कार्य कब तक पूरा होगा और हॉस्टल में सीटों की कमी को कैसे दूर किया जाएगा।












