
उद्घाटन से पहले ही भारतमाला हाईवे में आई दरारें, जांच के लिए दिल्ली से पहुंची टीमरायपुर | भारतमाला हाईवे के उद्घाटन से पहले ही सड़क पर दरारें आने का मामला सामने आया है। करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे इस हाईवे की गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने जांच तेज कर दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली स्थित मुख्यालय की टीम भी निरीक्षण के लिए पहुंची है। सड़क की अलग-अलग परतों से नमूने लेकर जांच कराई जा रही है। वहीं, संबंधित निर्माण एजेंसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।कांकेर जिले में सड़क पर दिखीं दरारेंजानकारी के अनुसार, रायपुर-विशाखापट्टनम भारतमाला परियोजना के तहत बनाए जा रहे छह लेन हाईवे पर कांकेर जिले में दरारें दिखाई दीं। सरगी और बासनवाही के बीच मौलीपारा के आसपास सड़क का हिस्सा प्रभावित हुआ है। हाईवे का उद्घाटन होने से पहले ही सड़क पर दरारें आने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।मामला सामने आने के बाद एनएचएआई के अधिकारियों ने प्रभावित हिस्से का निरीक्षण किया। सड़क में दरार आने के कारणों का पता लगाने के लिए तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल प्रभावित हिस्से की मरम्मत कर दी गई है।### 15 तरह के परीक्षणों से होगी सड़क की गुणवत्ता की जांचसड़क की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए लगभग 15 प्रकार के तकनीकी परीक्षण कराए जा रहे हैं। अधिकारियों ने सड़क की ऊपरी और निचली परतों से नमूने एकत्र किए हैं। निष्पक्ष जांच के लिए दिल्ली की एनएबीएल से मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला के माध्यम से भी सैंपलिंग कराई गई है।जांच में सड़क की मजबूती, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, परतों की मोटाई और निर्माण के दौरान अपनाई गई तकनीकी प्रक्रियाओं को परखा जाएगा। इसके अलावा सड़क की परतों की दबाव क्षमता और जल निकासी व्यवस्था में किसी तरह की कमी होने की भी जांच की जाएगी।इन परीक्षणों की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क पर दरारें आने की मुख्य वजह क्या है और निर्माण कार्य में किसी प्रकार की तकनीकी लापरवाही हुई है या नहीं।### निर्माण एजेंसी को जारी किया गया नोटिसहाईवे पर दरारें आने के मामले में एनएचएआई ने संबंधित निर्माण एजेंसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। विभागीय जांच के साथ-साथ स्वतंत्र एजेंसी से भी तकनीकी जांच कराई जा रही है।जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार किया गया था या नहीं। यदि निर्माण सामग्री अथवा तकनीकी प्रक्रिया में कोई कमी सामने आती है, तो उसकी जिम्मेदारी तय की जा सकती है। हालांकि, अभी जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है और दरारों के वास्तविक कारण की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।### 4,146 करोड़ रुपये की परियोजना पर उठे सवालरायपुर-विशाखापट्टनम भारतमाला हाईवे छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है। राज्य में इस छह लेन हाईवे की लंबाई लगभग 125 किलोमीटर बताई गई है। इस हिस्से के निर्माण पर करीब 4,146 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।इतनी बड़ी लागत वाली परियोजना में उद्घाटन से पहले ही दरारें सामने आने से सड़क निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि सड़क में दरारें किन कारणों से आईं और निर्माण कार्य में किसी स्तर पर कमी रही या नहीं।### किसानों और विद्यार्थियों की परेशानी भी आई सामनेहाईवे निर्माण के कारण आसपास के गांवों के लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मालवीपारा पंचायत के किसानों ने खेतों तक पहुंचने का रास्ता प्रभावित होने की शिकायत की है। ग्रामीणों के अनुसार, हाईवे बनने से आवागमन के पुराने रास्तों पर असर पड़ा है, जिससे खेती-किसानी के काम में दिक्कत हो रही है।इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर विद्यार्थियों की परेशानी का मुद्दा भी सामने आया है। ग्रामीणों ने हाईस्कूल तक पहुंच और वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। उनकी मांग है कि बच्चों की पढ़ाई और ग्रामीणों की आवाजाही प्रभावित न हो, इसके लिए उचित व्यवस्था की जाए।### जांच रिपोर्ट पर टिकी नजरेंफिलहाल एनएचएआई की टीम सड़क की गुणवत्ता की जांच में जुटी है। प्रभावित हिस्से की मरम्मत की जा चुकी है, लेकिन दरारें आने की असली वजह का पता तकनीकी परीक्षणों की रिपोर्ट के बाद ही चलेगा। जांच में यदि निर्माण संबंधी खामियां सामने आती हैं, तो संबंधित एजेंसी की जवाबदेही तय करने की कार्रवाई की जा सकती है।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि उद्घाटन से पहले ही करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे भारतमाला हाईवे में दरारें क्यों आईं और क्या निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप किया गया था।












