
छत्तीसगढ़ के सिरपुर को मिली वैश्विक पहचान, UNESCO की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में शामिलरायपुर/महासमुंद। छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर सिरपुर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। महासमुंद जिले में महानदी के तट पर स्थित प्राचीन ऐतिहासिक स्थल सिरपुर को UNESCO की विश्व धरोहर स्थलों की अस्थायी सूची (Tentative List) में शामिल किया गया है। इससे सिरपुर को भविष्य में विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिलाने की उम्मीद मजबूत हुई है। <u></u>प्राचीन इतिहास और स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है सिरपुरसिरपुर को प्राचीन काल में श्रीपुर के नाम से जाना जाता था। यह स्थल पांचवीं से बारहवीं शताब्दी के बीच दक्षिण कोसल की राजधानी और एक प्रमुख राजनीतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक एवं व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ था। यहां मौजूद प्राचीन मंदिर, बौद्ध विहार, पुरातात्विक अवशेष और ऐतिहासिक संरचनाएं उस समय की समृद्ध सभ्यता और स्थापत्य कला की गवाही देती हैं।सिरपुर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां हिंदू, बौद्ध और जैन धर्मों से जुड़ी ऐतिहासिक संरचनाएं एक ही सांस्कृतिक क्षेत्र में देखने को मिलती हैं। यह धार्मिक सह-अस्तित्व, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और प्राचीन नगर व्यवस्था का महत्वपूर्ण उदाहरण है।लक्ष्मण मंदिर सहित नौ प्रमुख स्थलों को किया गया शामिलUNESCO की अस्थायी सूची में सिरपुर के सांस्कृतिक और पुरातात्विक परिदृश्य को ‘Sirpur Cultural and Archaeological Landscape’ नाम से शामिल किया गया है। इसके प्रस्तावित मुख्य क्षेत्र में नौ प्रमुख ऐतिहासिक स्थल शामिल हैं।इनमें लक्ष्मण मंदिर, राम मंदिर, गंधेश्वर मंदिर, आनंदप्रभु कुटी विहार, स्वस्तिक विहार, प्राचीन बाजार परिसर, राजमहल, हर्षगुप्त एवं तीवरदेव बौद्ध विहार और बालेश्वर स्मारक समूह प्रमुख हैं।इन स्थलों से प्राचीन धार्मिक परंपराओं, व्यापारिक गतिविधियों, नगर नियोजन और वास्तुकला के विकास की जानकारी मिलती है।सातवीं शताब्दी का लक्ष्मण मंदिर है खास पहचानसिरपुर का लक्ष्मण मंदिर अपनी विशिष्ट स्थापत्य शैली के लिए प्रसिद्ध है। इसे भारत के प्राचीन और बेहतर संरक्षित ईंटों से निर्मित मंदिरों में गिना जाता है। मंदिर की वास्तुकला, नक्काशी और ऐतिहासिक महत्त्व इसे देश के प्रमुख पुरातात्विक स्थलों में स्थान दिलाते हैं।इसके अलावा यहां स्थित बौद्ध विहार और अन्य प्राचीन संरचनाएं सिरपुर के उस गौरवशाली इतिहास को दर्शाती हैं, जब यह क्षेत्र धार्मिक शिक्षा, कला और व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र था।UNESCO की अस्थायी सूची में शामिल होने का क्या है मतलब?किसी ऐतिहासिक स्थल का UNESCO की अस्थायी सूची में शामिल होना उसे अंतिम रूप से विश्व धरोहर घोषित किए जाने के समान नहीं है। यह उस दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआती कदम है।अब सिरपुर के लिए विस्तृत नामांकन दस्तावेज तैयार करने, ऐतिहासिक महत्त्व का प्रमाण प्रस्तुत करने, संरक्षण संबंधी व्यवस्थाओं और प्रबंधन योजना पर काम करने की आवश्यकता होगी। इसके बाद UNESCO की निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रस्ताव का मूल्यांकन किया जाएगा। अंतिम मंजूरी मिलने पर ही सिरपुर को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त होगा।भारत की ओर से सिरपुर का प्रस्ताव 28 सितंबर 2026 को UNESCO को प्रस्तुत किया गया था।पर्यटन और संरक्षण को मिल सकता है बढ़ावासिरपुर के अस्थायी सूची में शामिल होने से छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की संभावनाएं बढ़ी हैं। इससे भविष्य में देश-विदेश के पर्यटकों, इतिहासकारों और पुरातत्वविदों का ध्यान इस स्थल की ओर आकर्षित हो सकता है।साथ ही, सिरपुर की प्राचीन संरचनाओं के संरक्षण, पर्यटन सुविधाओं के विकास और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद भी है। हालांकि, इसके लिए योजनाबद्ध विकास और ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा।छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धिसिरपुर को UNESCO की अस्थायी सूची में जगह मिलना छत्तीसगढ़ की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह प्राचीन भारत की धार्मिक विविधता, स्थापत्य कला और नगर सभ्यता को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करता है।अब सभी की निगाहें सिरपुर के अगले चरण पर रहेंगी, जहां विस्तृत दस्तावेजीकरण, संरक्षण और नामांकन की प्रक्रिया के माध्यम से इसे स्थायी विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।












