
CGPSC घोटाला: पूर्व CM के OSD के नाम पर चयन की गारंटी, 3 करोड़ से ज्यादा वसूली का ED का दावारायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की राज्य सेवा परीक्षा 2021 में कथित भ्रष्टाचार और गड़बड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में कई अहम खुलासे सामने आए हैं। ED के अनुसार, अभ्यर्थियों को परीक्षा में चयन कराने का भरोसा देकर तीन करोड़ रुपये से अधिक की रकम कथित तौर पर वसूली गई। इस मामले में बलरामपुर-रामानुजगंज के तत्कालीन अपर कलेक्टर और पूर्व मुख्यमंत्री कार्यालय में OSD रहे चेतन बोरघरिया को 11 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। 170 लेनदेन में खाते में जमा हुए 66.64 लाख रुपयेED की जांच के मुताबिक चेतन बोरघरिया के बैंक खाते में 170 अलग-अलग लेनदेन के माध्यम से कुल 66.64 लाख रुपये नकद जमा किए गए। जांच एजेंसी को बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच भी कई वित्तीय लेनदेन होने की जानकारी मिली है। गिरफ्तारी के बाद रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत ने चेतन बोरघरिया को छह दिन की ED हिरासत में भेजा है। चयन की गारंटी देकर जुटाए तीन करोड़ से ज्यादाED के अनुसार, उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने CGPSC राज्य सेवा परीक्षा 2021 में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों से कथित तौर पर तीन करोड़ रुपये से अधिक की रकम जुटाई। अभ्यर्थियों को परीक्षा में फायदा पहुंचाने और चयन सुनिश्चित कराने का भरोसा दिया गया था।जांच में यह भी सामने आया कि इस भरोसे के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यालय में OSD रहे चेतन बोरघरिया के नाम और पद का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया। लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का भी दावाED की जांच में कथित नेटवर्क के तहत अभ्यर्थियों को प्रारंभिक परीक्षा से पहले रायपुर के सिद्धि विनायक मैरिज पैलेस में एकत्र किए जाने की बात सामने आई है। एजेंसी का दावा है कि वहां अभ्यर्थियों को कथित तौर पर लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया।इसके बाद कुछ अभ्यर्थियों को बारनवापारा अभयारण्य क्षेत्र के एक रिसॉर्ट में ठहराए जाने और मुख्य परीक्षा की तैयारी कराने की बात भी जांच में सामने आई है। ED के मुताबिक, वहां मुख्य परीक्षा से संबंधित कथित लीक प्रश्नपत्र के आधार पर तैयारी कराई गई। मोबाइल और डिजिटल साक्ष्यों से मिली अहम जानकारीED ने 1 सितंबर को चेतन बोरघरिया से जुड़े परिसरों में तलाशी ली थी। इस दौरान मोबाइल फोन समेत कई डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। इनकी फोरेंसिक जांच में चेतन बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच हुई बातचीत सामने आने की बात ED ने कही है।एजेंसी के अनुसार, बातचीत में पैसों के लेनदेन, रकम वापस करने और भुगतान की मांग से संबंधित जानकारी मिली। इन डिजिटल साक्ष्यों को बैंकिंग रिकॉर्ड और पीएमएलए के तहत दर्ज बयानों के साथ मिलाकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। फिगरकेव कंपनी के लेनदेन भी जांच के दायरे मेंजांच के दौरान फिगरकेव ई-कॉम (OPC) प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े वित्तीय लेनदेन भी ED की जांच के दायरे में आए हैं। एजेंसी को आशंका है कि कंपनी का इस्तेमाल कथित तौर पर रकम की लेयरिंग और उसे अलग-अलग माध्यमों से आगे भेजने के लिए किया गया हो सकता है। कंपनी से जुड़े लेनदेन और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच जारी है। EOW-ACB की FIR से शुरू हुई कार्रवाईCGPSC की राज्य सेवा परीक्षा 2020 और 2021 में कथित भ्रष्टाचार, हेरफेर और अनियमितताओं को लेकर रायपुर EOW-ACB में FIR दर्ज की गई थी। बाद में मामले की मूल अपराध संबंधी जांच CBI ने अपने हाथ में ली। CBI ने तत्कालीन CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी समेत अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर मामले में आरोपपत्र भी पेश किया है।अब अपराध से कथित तौर पर अर्जित रकम की जांच ED कर रही है। एजेंसी का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों, बैंकिंग रिकॉर्ड और बयानों के आधार पर चेतन बोरघरिया की कथित भूमिका सामने आई है। इसी आधार पर उन्हें PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया है। मामले में ED की जांच अभी जारी है। नोट: ऊपर दी गई जानकारी में आरोप और जांच एजेंसी के दावे को उसी रूप में रखा गया है; आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होगा।












