
रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर से छत्तीसगढ़ के छह जिलों की बदलेगी तस्वीर, व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार
रायपुर। छत्तीसगढ़ में बन रहा रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रदेश के लिए बड़ी कनेक्टिविटी परियोजना साबित हो सकता है। करीब 627 किलोमीटर लंबे इस आर्थिक गलियारे का लगभग 384 किलोमीटर हिस्सा छत्तीसगढ़ से होकर गुजरेगा। इससे प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक और खनिज क्षेत्रों को झारखंड के साथ बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा।
इस कॉरिडोर से रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा और जशपुर सहित कई जिलों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। खासकर जशपुर जिले में पथलगांव, कांसाबेल, कुनकुरी, दुलदुला और जशपुर जैसे क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। इससे माल परिवहन, स्थानीय व्यापार और रोजगार के नए अवसर बढ़ सकते हैं।
3,147 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट पर काम तेज
रायपुर-धनबाद कॉरिडोर के पथलगांव-कुनकुरी से छत्तीसगढ़-झारखंड सीमा तक के 104.25 किलोमीटर हिस्से पर करीब 3,147 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। इस मार्ग पर यातायात को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए 382 छोटे-बड़े ढांचों का निर्माण किया जा रहा है। इनमें सात बड़े पुल, 30 छोटे पुल, छह फ्लाईओवर और एक एलिवेटेड वायाडक्ट शामिल हैं।
उद्योग और व्यापार को मिलेगा फायदा
कॉरिडोर के पूरा होने के बाद छत्तीसगढ़ के औद्योगिक क्षेत्रों की झारखंड के कोयला और इस्पात क्षेत्र से कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इससे कोयला, खनिज, स्टील और अन्य औद्योगिक सामान के परिवहन में समय और लागत कम होने की उम्मीद है। साथ ही ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल की ओर व्यापारिक आवाजाही को भी गति मिलने की संभावना है।
रोजगार और स्थानीय कारोबार की संभावनाएं
बेहतर सड़क संपर्क से लॉजिस्टिक्स, परिवहन, छोटे कारोबार और सेवा क्षेत्र को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों के मुताबिक, तेज और सुरक्षित कनेक्टिविटी से ईंधन की बचत और परिवहन लागत में कमी आएगी। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार और नए व्यवसायों के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर को मध्य भारत को देश के पूर्वी हिस्से से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। इसके पूरा होने से छत्तीसगढ़ के कई जिलों में औद्योगिक गतिविधियों और व्यापार को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।













