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मानिकपुर खदान विस्तार पर सियासत तेज, लखन और जयसिंह आमने-सामने

मानिकपुर खदान विस्तार पर सियासत तेज, लखन और जयसिंह आमने-सामने

 

कोरबा। एसईसीएल की मानिकपुर खुली खदान के विस्तार को लेकर प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। 21 अगस्त को प्रस्तावित जनसुनवाई को लेकर उद्योग मंत्री एवं कोरबा विधायक लखन लाल देवांगन ने एसईसीएल प्रबंधन को प्रभावित परिवारों के मुआवजा, पुनर्वास और पुनर्स्थापना से जुड़े लंबित मामलों के निराकरण के बाद ही जनसुनवाई कराने के निर्देश दिए हैं।

 

मानिकपुर ओपन कास्ट एक्सटेंशन परियोजना के तहत खदान की उत्पादन क्षमता 5.25 एमटीपीए से बढ़ाकर 7 एमटीपीए करने का प्रस्ताव है। इसके लिए 21 अगस्त को पर्यावरणीय जनसुनवाई प्रस्तावित है। मंत्री ने भिलाईखुर्द में मुआवजा एवं पुनर्वास से जुड़े लंबित मामलों तथा काचांदी नाला डायवर्सन की प्रारंभिक निरीक्षण रिपोर्ट की प्रक्रिया पूरी होने तक जनसुनवाई स्थगित करने के निर्देश दिए हैं।

 

वहीं, पूर्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल ने प्रभावित आठ गांवों के ग्रामीणों के साथ खड़े होते हुए जनसुनवाई तत्काल निरस्त करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी जमीन का अधिग्रहण वर्ष 1964 में हुआ था, लेकिन कई परिवार आज भी मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

 

अग्रवाल ने एसईसीएल के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक को पत्र लिखकर पहले प्रभावित परिवारों के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं का समाधान करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन प्रभावित परिवारों के साथ अन्याय की कीमत पर विकास स्वीकार नहीं किया जा सकता।

 

ग्रामीणों ने भी स्पष्ट किया है कि पुराने विस्थापन, मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार के मामलों का समाधान होने तक वे जनसुनवाई का विरोध करेंगे। ऐसे में मानिकपुर खदान विस्तार का मुद्दा अब राजनीतिक और जनहित के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बन गया है।

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