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गरीबी से लड़कर इतिहास रचने निकला आदिवासी युवक, एवरेस्ट बेस कैंप फतह करने के बाद अब लद्दाख और किलीमंजारो पर नजर

गरीबी से लड़कर इतिहास रचने निकला आदिवासी युवक, एवरेस्ट बेस कैंप फतह करने के बाद अब लद्दाख और किलीमंजारो पर नजर

 

कोरबा जिले के वनांचल क्षेत्र पाली (लोहाडिया) के रहने वाले आदिवासी युवक हरीश कुमार पोरते ने कठिन आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद पर्वतारोहण की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। गरीबी और संसाधनों की कमी के बीच हरीश ने कर्ज लेकर एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचने का सपना पूरा किया और अब वह लद्दाख अभियान तथा अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी किलीमंजारो फतह करने की तैयारी में जुटे हैं।

 

हरीश का कहना है कि सीमित साधनों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन जुनून और मेहनत के दम पर उन्होंने पर्वतारोहण में लगातार आगे बढ़ने का फैसला किया। वर्तमान में वह शासन से अनुमति और सहयोग मिलने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि आगामी अभियानों में हिस्सा लेकर देश और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन कर सकें।

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