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कोरबा: पुटका पहाड़ में ‘चलो राम कचहरी’ कार्यक्रम की तैयारी, बच्चों की सुरक्षा और आदिवासी सहभागिता पर सवाल

कोरबा: पुटका पहाड़ में ‘चलो राम कचहरी’ कार्यक्रम की तैयारी, बच्चों की सुरक्षा और आदिवासी सहभागिता को लेकर उठे सवाल17 अक्टूबर को सुबह 7 बजे से प्रस्तावित है यात्रा, दुर्गम पहाड़ी रास्तों और वन्यजीवों की मौजूदगी के बीच सुरक्षा व्यवस्था पर सबकी नजरकोरबा। नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा बालको क्षेत्र के अंतर्गत वनाच्छादित पुटका पहाड़ स्थित राम कचहरी में 17 अक्टूबर को ‘चलो राम कचहरी’ कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। कार्यक्रम को लेकर निगम की ओर से प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है। हालांकि, दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में आयोजन की तैयारियों के बीच स्कूली बच्चों की सुरक्षा, वन्यजीवों के संरक्षण और स्थानीय पहाड़ी कोरवा जनजातीय समुदाय की सहभागिता को लेकर कई सवाल सामने आए हैं।पुटका पहाड़ कोरबा जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित है। यह क्षेत्र घने जंगलों और कठिन पहाड़ी रास्तों से घिरा हुआ है। पहाड़ तक पहुंचने के लिए ऊंची चढ़ाई और दुर्गम मार्गों से गुजरना पड़ता है। ऐसे में कार्यक्रम में स्कूली बच्चों सहित बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की स्थिति में सुरक्षित आवागमन और आपातकालीन व्यवस्था को लेकर स्पष्ट जानकारी होना आवश्यक है।दुर्गम रास्तों में बच्चों की सुरक्षा सबसे अहमपुटका पहाड़ स्थित राम कचहरी तक सामान्य दिनों में सीमित लोगों की आवाजाही होती है। ऐसे स्थान पर बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करने से पहले रास्तों की स्थिति, संभावित जोखिम और सुरक्षा इंतजामों का आकलन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।यदि कार्यक्रम में स्कूली बच्चों को शामिल किया जाता है, तो उनके सुरक्षित परिवहन, पैदल यात्रा के दौरान निगरानी, जिम्मेदार अधिकारियों की तैनाती और किसी आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी होगा। आयोजन से पहले इन तैयारियों को लेकर संबंधित विभागों की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने आना अपेक्षित है।पहाड़ी कोरवा समुदाय की आस्था से जुड़ा है राम कचहरीपुटका पहाड़ स्थित राम कचहरी स्थानीय पहाड़ी कोरवा समुदाय और अन्य जनजातीय समूहों की आस्था एवं परंपराओं से जुड़ा स्थल माना जाता है। स्थानीय समुदाय के लोग इस स्थान को देवस्थल के रूप में देखते हुए अपनी पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार धार्मिक गतिविधियां करते आए हैं।ऐसे में यहां आयोजित होने वाले किसी भी कार्यक्रम में स्थानीय लोगों की सहभागिता और उनकी धार्मिक परंपराओं का सम्मान महत्वपूर्ण है। खबर के अनुसार, पहाड़ी कोरवा समुदाय के जिला अध्यक्ष को भी कार्यक्रम की जानकारी नहीं होने की बात सामने आई है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित पक्षों की आधिकारिक पुष्टि सामने आना बाकी है।इस स्थिति में यह सवाल उठ रहा है कि आयोजन से पहले स्थानीय जनजातीय समुदाय को किस प्रकार जानकारी दी गई और उन्हें कार्यक्रम की तैयारियों में कितना शामिल किया गया। किसी भी धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन में स्थानीय समुदाय के साथ समन्वय स्थापित करना और उनकी भावनाओं का सम्मान करना आवश्यक माना जाता है।वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण की चुनौतीपुटका पहाड़ घने जंगलों से घिरा क्षेत्र है। ऐसे वन क्षेत्रों में तेंदुए, भालू, सांप और अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, कार्यक्रम स्थल पर वर्तमान में किसी विशेष वन्यजीव की मौजूदगी की पुष्टि उपलब्ध नहीं है।जंगल के बीच बड़े आयोजन के दौरान लोगों की आवाजाही, वाहनों का परिचालन और ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग से वन्यजीवों तथा प्राकृतिक वातावरण पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को ध्यान में रखना जरूरी है। इसके लिए वन विभाग की निगरानी, आवश्यक सुरक्षा उपाय और कचरा प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं पर भी ध्यान देना होगा।नगर निगम और संबंधित विभागों की तैयारियों पर नजर‘चलो राम कचहरी’ कार्यक्रम को लेकर नगर निगम और वन विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आयोजन से पहले सुरक्षा व्यवस्था, पहाड़ी मार्ग की स्थिति, वन्यजीवों से बचाव के उपाय और स्थानीय समुदाय के साथ समन्वय को लेकर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।कार्यक्रम को सफल बनाने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है कि इसमें शामिल होने वाले बच्चों और अन्य लोगों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो। साथ ही, स्थानीय आदिवासी समुदाय की आस्था एवं परंपराओं का सम्मान और वन क्षेत्र के प्राकृतिक वातावरण का संरक्षण भी प्राथमिकता में शामिल रहे।फिलहाल, 17 अक्टूबर को प्रस्तावित ‘चलो राम कचहरी’ कार्यक्रम से पहले सुरक्षा इंतजामों, स्थानीय समुदाय की सहभागिता और वन विभाग की तैयारियों को लेकर संबंधित विभागों की ओर से स्पष्ट जानकारी का इंतजार है।

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