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छत्तीसगढ़ की नदियों में बढ़ा प्रदूषण, 30 हजार से ज्यादा मामले दर्ज; रायपुर सबसे आगे

छत्तीसगढ़ की नदियों में बढ़ा प्रदूषण, 30 हजार से ज्यादा मामले दर्ज; रायपुर सबसे आगेरायपुर। छत्तीसगढ़ में नदियों के प्रदूषण की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। जुलाई 2026 में जलशक्ति मंत्रालय को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में नदियों को प्रदूषित करने के 30 हजार से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। उपलब्ध निकायवार आंकड़ों में रायपुर सबसे आगे है, जहां 17,371 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इसके बाद रायगढ़, बिलासपुर और कोरबा में भी बड़ी संख्या में प्रदूषण के मामले सामने आए हैं।रायपुर में सबसे ज्यादा मामलेरिपोर्ट के मुताबिक रायपुर में नदी प्रदूषण से जुड़े 17,371 मामले दर्ज हुए हैं। शहर में बढ़ती आबादी और तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्र के कारण नालियों तथा सीवरेज से निकलने वाले गंदे पानी का दबाव जलस्रोतों पर बढ़ रहा है। नालों का दूषित पानी कई जगह सीधे नदियों तक पहुंच रहा है।रायगढ़ और बिलासपुर में भी स्थिति चिंताजनकनदी प्रदूषण के मामलों में रायगढ़ 6,520 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर है। इसके बाद बिलासपुर में 3,729 मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं औद्योगिक गतिविधियों के लिए पहचाने जाने वाले कोरबा में 1,204 प्रकरण सामने आए हैं।इसके अलावा धमतरी में 594 और कांकेर में 514 मामले दर्ज किए गए हैं। छोटे निकाय भी इस समस्या से प्रभावित हैं। नवापारा में 159, राजिम में 151 और सिमगा में 68 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इससे साफ है कि नदी प्रदूषण अब केवल बड़े शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं है।सीवरेज और औद्योगिक कचरा मुख्य वजहरिपोर्ट के अनुसार नदियों में प्रदूषण फैलने के पीछे सबसे बड़ी वजह सीवरेज, नालियों का गंदा पानी, घरेलू अपशिष्ट और औद्योगिक कचरा है।रायपुर में सीवरेज और नालियों से निकलने वाला गंदा पानी प्रमुख समस्या बना हुआ है। वहीं रायगढ़ और कोरबा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में औद्योगिक अपशिष्ट नदियों के लिए बड़ा खतरा है। प्रदूषित पानी के नदियों में पहुंचने से जल गुणवत्ता के साथ-साथ जलीय जीवों और आसपास के पर्यावरण पर भी असर पड़ रहा है।छोटे शहरों की नालियां भी बन रही हैं समस्यारिपोर्ट से यह भी सामने आया है कि छोटे नगर निकायों में नालियों के पानी का उचित उपचार नहीं होने के कारण समस्या बढ़ रही है। कई जगह गंदा पानी सीधे जलस्रोतों में पहुंच रहा है। इससे नदी प्रदूषण को नियंत्रित करना चुनौती बन गया है।इससे पहले भी प्रदेश की प्रमुख नदियों—महानदी, अरपा, खारून, केलो, शिवनाथ और हसदेव—के प्रदूषित हिस्सों में मिलने वाले नालों और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की स्थिति को लेकर विभागीय स्तर पर जानकारी मांगी गई थी।STP की क्षमता का भी पूरा उपयोग नहींनदी प्रदूषण रोकने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट महत्वपूर्ण हैं, लेकिन प्रदेश में उपलब्ध क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। हाल की विभागीय रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में प्रतिदिन करीब 743.51 एमएलडी सीवेज उत्पन्न होता है। 194 निकायों में 25 STP संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता 458.30 एमएलडी है। इनमें से वर्तमान में करीब 306.25 एमएलडी क्षमता का ही उपयोग हो रहा है, जबकि 152.05 एमएलडी क्षमता अप्रयुक्त है।प्रदूषण फैलाने वालों पर कार्रवाई की तैयारीनगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के मुख्य अभियंता राजेश शर्मा के अनुसार, NGT के दिशा-निर्देशों के तहत प्रदेश की नदियों की अद्यतन स्थिति की रिपोर्ट जलशक्ति मंत्रालय को भेजी गई है। उन्होंने बताया कि नदियों को प्रदूषित करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। निकायों के माध्यम से अब तक 30 हजार से अधिक मामलों में कार्रवाई किए जाने की जानकारी भी दी गई है।प्रमुख आंकड़े- रायपुर: 17,371 मामले- रायगढ़: 6,520 मामले- बिलासपुर: 3,729 मामले- कोरबा: 1,204 मामले- धमतरी: 594 मामले- कांकेर: 514 मामले- नवापारा: 159 मामले- राजिम: 151 मामले- सिमगा: 68 मामलेप्रदेश में सामने आए ये आंकड़े बताते हैं कि नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि सीवरेज व्यवस्था, STP संचालन और औद्योगिक अपशिष्ट के निस्तारण की प्रभावी व्यवस्था करना भी जरूरी है।

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