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छत्तीसगढ़: उदंती-सीतानदी क्षेत्र में विस्थापन के विरोध में एकजुट हुए 128 गांवों के ग्रामीण, बोले- हमें विस्थापन नहीं, विकास चाहिए

छत्तीसगढ़: उदंती-सीतानदी क्षेत्र में विस्थापन के विरोध में एकजुट हुए 128 गांवों के ग्रामीण, बोले- हमें विस्थापन नहीं, विकास चाहिएगरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद और धमतरी जिले के सीमावर्ती उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में विस्थापन की आशंका को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर राजापड़ाव क्षेत्र के ग्राम मोंगराडीह में जल-जंगल-जमीन बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में विशाल जनसभा आयोजित की गई। बैठक में 128 गांवों और पारा-टोलों के ग्रामीणों ने एकजुट होकर अपनी मांगें रखीं। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि वे अपनी पुश्तैनी जमीन छोड़कर कहीं और नहीं जाना चाहते, बल्कि अपने क्षेत्र में ही सड़क, बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास चाहते हैं।विस्थापन और नाइट कर्फ्यू का किया विरोधमोंगराडीह में आयोजित बैठक में ग्रामीणों ने उदंती-सीतानदी क्षेत्र में विस्थापन की आशंका और नाइट कर्फ्यू को लेकर चिंता जताई। ग्रामीणों का कहना है कि पीढ़ियों से वे इसी क्षेत्र में निवास करते आ रहे हैं और उनकी आजीविका खेती-किसानी तथा जंगलों पर निर्भर है। ऐसे में उन्हें अपनी जमीन और गांव से दूर करने के बजाय क्षेत्र में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।बैठक में नाइट कर्फ्यू हटाने, विस्थापन पर रोक लगाने तथा वन ग्रामों में रहने वाले किसानों को उनकी जमीन का स्थायी मालिकाना हक देने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र के विकास और स्थानीय लोगों के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाना चाहिए।जल-जंगल-जमीन पर अधिकार की उठाई आवाजजल-जंगल-जमीन बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष सिरधन सोम ने कहा कि यह क्षेत्र संविधान की पांचवीं अनुसूची से संबंधित है। उन्होंने स्थानीय मूल निवासियों के पारंपरिक और संवैधानिक अधिकारों का सम्मान किए जाने की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रामीण अपने अधिकारों की लड़ाई शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से जारी रखेंगे।बैठक में संगठन को गांव-गांव तक मजबूत बनाने और अधिक से अधिक ग्रामीणों को इससे जोड़ने पर भी चर्चा हुई। समिति ने सामाजिक और राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर क्षेत्र के हित में एकजुट रहने का आह्वान किया।ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांगबैठक में जिला पंचायत सदस्य लोकेश्वरी नेताम ने कहा कि 128 गांवों और पारा-टोलों के लोगों के भविष्य से जुड़ा यह महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के लिए एकजुट होकर आवाज उठाने की आवश्यकता बताई।समिति के संरक्षक दैनिक राम मंडावी ने संगठन को मजबूत बनाने के लिए प्रत्येक गांव से एक युवा, एक बुजुर्ग और एक शिक्षित महिला को जोड़ने का सुझाव दिया। बैठक में महिलाओं ने भी क्षेत्र की समस्याओं, अधिकारों और विस्थापन की आशंकाओं को लेकर अपनी बात रखी।ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि उनके गांवों में सड़क, बिजली, पानी सहित अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि उन्हें विकास के लिए अपना घर और गांव छोड़ने की स्थिति का सामना न करना पड़े।17 अक्टूबर को कोकड़ी में होगी महाग्राम सभाबैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आगामी 17 अक्टूबर को राजापड़ाव क्षेत्र के ग्राम कोकड़ी में विशाल महाग्राम सभा आयोजित की जाएगी। इसमें कांकेर और महासमुंद लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, सिहावा और बिंद्रानवागढ़ विधानसभा क्षेत्र के विधायकों, जिला पंचायत अध्यक्ष तथा अन्य जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा।इस महाग्राम सभा का उद्देश्य ग्रामीणों की समस्याओं और मांगों को जनप्रतिनिधियों के सामने रखना तथा उनके समाधान के लिए संवाद करना है। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि समिति के प्रतिनिधि जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर उन्हें कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण देंगे।ग्रामीणों की एकजुटता से बढ़ा आंदोलनउदंती-सीतानदी क्षेत्र में विस्थापन का मुद्दा वन्यजीव संरक्षण, स्थानीय लोगों के अधिकारों और क्षेत्रीय विकास से जुड़ा हुआ है। ग्रामीण चाहते हैं कि संरक्षण और विकास से संबंधित निर्णय लेते समय उनकी समस्याओं, आजीविका तथा कानूनी अधिकारों को प्राथमिकता दी जाए।मोंगराडीह की बैठक में 128 गांवों के ग्रामीणों की एकजुटता ने इस मुद्दे को फिर से प्रमुखता से सामने ला दिया है। अब 17 अक्टूबर को ग्राम कोकड़ी में होने वाली महाग्राम सभा पर सबकी नजरें टिकी हैं, जहां ग्रामीण अपनी मांगों को जनप्रतिनिधियों के सामने रखेंगे।ग्रामीणों का स्पष्ट संदेश है कि उन्हें अपनी पुश्तैनी जमीन से विस्थापन नहीं, बल्कि अपने ही क्षेत्र में सम्मानजनक जीवन और बुनियादी सुविधाओं के साथ विकास चाहिए।

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