
ऋण माफी की मांग को लेकर किसानों का रायपुर कूच, मुरमुंदा में पुलिस ने रोकादुर्ग। छत्तीसगढ़ के धमधा क्षेत्र में ऋण माफी समेत विभिन्न मांगों को लेकर किसानों का आंदोलन लगातार जारी है। पिछले 17 दिनों से क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे किसानों ने गुरुवार को अपनी मांगों का समाधान नहीं होने पर राजधानी रायपुर की ओर मार्च शुरू कर दिया। किसानों के रायपुर कूच की सूचना के बाद प्रशासन ने उन्हें कुम्हारी पहुंचने से पहले मुरमुंदा में रोक दिया। भारी पुलिस बल के साथ प्रशासन ने संभाला मोर्चामुरमुंदा में किसानों को रोकने के लिए भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी तैनात रहे। किसान अपनी मांगों को लेकर आगे बढ़ने पर अड़े रहे। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने किसानों से बातचीत का रास्ता अपनाया और 10 किसानों के प्रतिनिधिमंडल को अधिकारियों से चर्चा के लिए रायपुर भेजा। वहीं, अन्य किसान मुरमुंदा में ही डटे रहे।17 दिनों से चल रही है भूख हड़तालकिसान बंधु संगठन के बैनर तले धमधा क्षेत्र में पिछले 17 दिनों से क्रमिक भूख हड़ताल चल रही है। किसानों का कहना है कि लंबे समय से अपनी समस्याओं को लेकर प्रशासन और बैंक अधिकारियों के चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें ठोस समाधान नहीं मिला है। इसी के चलते गुरुवार को किसानों ने राजधानी की ओर मार्च करने का निर्णय लिया।बुधवार को भी प्रशासन ने की थी बातचीतइससे पहले बुधवार को आंदोलन स्थल पर एसडीएम और तहसीलदार पहुंचे थे। अधिकारियों ने किसानों को बैंक जाकर संबंधित अधिकारियों से चर्चा करने की सलाह दी थी। हालांकि किसान नेताओं ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। किसान नेता बाबा टेक सिंह चंदेल का कहना है कि वे पहले ही बैंक और प्रशासनिक कार्यालयों में कई बार अपनी समस्याएं रख चुके हैं और अब केवल आश्वासन के बजाय ठोस समाधान चाहते हैं। क्या हैं किसानों की प्रमुख मांगें?धमधा ब्लॉक के खपरी, परसबोड़, कुटहा, पेंड्री और खैरझीटी गांवों के किसानों ने कोरोना काल से पहले निजी बैंक आईडीबीआई बैंक की विभिन्न शाखाओं से कृषि ऋण लिया था। किसान इन ऋणों की माफी की मांग कर रहे हैं।किसानों की प्रमुख मांगों में:वर्ष 2018 के एनपीए खातों की जांच कराना।पात्र किसानों को ऋण माफी योजना का लाभ देना।जांच पूरी होने तक ऋण वसूली पर रोक लगाना।किसानों की जमीन की कुर्की और नीलामी पर रोक लगाना।किसानों की समस्याओं का स्थायी समाधान करना।फिलहाल किसान मुरमुंदा में डटे हुए हैं, जबकि उनका प्रतिनिधिमंडल अधिकारियों के साथ चर्चा के लिए रायपुर गया है। प्रशासन और किसान प्रतिनिधियों के बीच होने वाली बातचीत के बाद आंदोलन की अगली दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।












