
छत्तीसगढ़ में व्यावसायिक शिक्षा पर संकट: 499 सरकारी स्कूलों में वोकेशनल ट्रेनर नहीं, 40 करोड़ के उपकरण बेकार
रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को रोजगारपरक शिक्षा देने के उद्देश्य से शुरू की गई व्यावसायिक शिक्षा योजना सवालों के घेरे में आ गई है। प्रदेश के 499 सरकारी स्कूलों में वर्तमान में वोकेशनल ट्रेनर उपलब्ध नहीं होने के कारण करोड़ों रुपये की लागत से खरीदे गए उपकरणों के उपयोग पर भी संकट खड़ा हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इन स्कूलों में करीब 40 करोड़ रुपये के उपकरण इस्तेमाल के इंतजार में पड़े हैं।
भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप
व्यावसायिक शिक्षकों की भर्ती को लेकर पहले से ही गंभीर आरोप सामने आए हैं। ठेका कंपनियों के माध्यम से अलग-अलग ट्रेड में वोकेशनल ट्रेनरों की नियुक्ति की प्रक्रिया सवालों के घेरे में रही है। मामले में जांच समिति भी गठित की गई थी और शिकायतकर्ताओं से दस्तावेज तथा अन्य साक्ष्य लिए गए थे।
छह कंपनियों के शिक्षकों पर रोक
रिपोर्ट के मुताबिक, समग्र शिक्षा मिशन के तहत व्यावसायिक शिक्षक उपलब्ध कराने वाली छह ठेका कंपनियों के नवनियुक्त शिक्षकों को आगामी आदेश तक स्कूलों में कार्यभार ग्रहण करने से रोक दिया गया था। इसके बाद संबंधित जिलों के शिक्षा अधिकारियों और स्कूल प्राचार्यों को भी निर्देश जारी किए गए।
करोड़ों के उपकरणों का नहीं हो पा रहा उपयोग
व्यावसायिक शिक्षा के तहत स्कूलों में अलग-अलग ट्रेड के लिए उपकरण और संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। लेकिन प्रशिक्षक नहीं होने की स्थिति में विद्यार्थियों को इन संसाधनों का व्यावहारिक प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है। इससे सरकारी खर्च से खरीदे गए करीब 40 करोड़ रुपये के उपकरणों के लंबे समय तक अनुपयोगी पड़े रहने की चिंता बढ़ गई है।
विद्यार्थियों के प्रशिक्षण पर असर
व्यावसायिक शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्कूल स्तर पर ही रोजगार से जुड़े कौशल का प्रशिक्षण देना है। ऐसे में प्रशिक्षकों की कमी से योजना का मूल उद्देश्य प्रभावित होने की आशंका है। अब निगाहें भर्ती प्रक्रिया की जांच और विभाग की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।













