
रायपुर में फर्जी आधार कार्ड से 5 एकड़ जमीन बेचने का प्रयास, कारोबारी से 23 लाख रुपये की ठगीरायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में जमीन की खरीद-बिक्री के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक व्यक्ति ने दूसरे की करीब पांच एकड़ कृषि भूमि को अपनी जमीन बताकर कारोबारी से 23 लाख रुपये ले लिए। इस मामले में जमीन के वास्तविक मालिक के नाम पर कथित तौर पर फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल किया गया। जमीन की रजिस्ट्री नहीं होने पर पीड़ित कारोबारी ने पुलिस से शिकायत की। शिकायत के आधार पर मंदिर हसौद पुलिस ने आरोपित के खिलाफ धोखाधड़ी और दस्तावेजों की कूटरचना से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।34 लाख रुपये प्रति एकड़ में तय हुआ था सौदामिली जानकारी के अनुसार, रायपुर के रामसागरपारा निवासी कारोबारी राजकुमार दम्मानी ने मंदिर हसौद क्षेत्र में स्थित कृषि भूमि खरीदने के लिए सौदा किया था। यह जमीन सात खसरों में दर्ज थी, जिसका कुल रकबा 1.857 हेक्टेयर यानी लगभग पांच एकड़ बताया गया है। जमीन की कीमत 34 लाख रुपये प्रति एकड़ तय की गई थी।शिकायत के मुताबिक, जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में वास्तविक मालिक का नाम आदित्य प्रताप सिंह, पिता बृजपाल सिंह दर्ज है। वहीं, सौदा करने वाले व्यक्ति का नाम भी आदित्य प्रताप सिंह बताया गया है, लेकिन उसके पिता का नाम डॉ. भानुप्रताप सिंह है। आरोप है कि समान नाम का फायदा उठाकर उसने खुद को जमीन का वास्तविक मालिक बताया और जमीन बेचने का इकरारनामा कर लिया।टोकन राशि सहित 23 लाख रुपये का भुगतानकारोबारी की शिकायत के अनुसार, 28 अक्टूबर 2024 को मंदिर हसौद स्थित गुजराती होटल के सामने सौदे के लिए एक लाख रुपये नकद टोकन राशि दी गई थी। इसके बाद अलग-अलग तारीखों में बैंक खाते और आरटीजीएस के माध्यम से 22 लाख रुपये और दिए गए। इस तरह जमीन खरीदने के लिए कुल 23 लाख रुपये का भुगतान किया गया।इसी दिन जमीन की बिक्री के संबंध में इकरारनामा भी कराया गया था। कारोबारी को उम्मीद थी कि तय प्रक्रिया के अनुसार जमीन की रजिस्ट्री पूरी कर दी जाएगी।रजिस्ट्री के लिए कहने पर करने लगा टालमटोलआरोप है कि पूरी रकम लेने के बाद जब कारोबारी ने जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए कहा, तो संबंधित व्यक्ति टालमटोल करने लगा। उसने जमीन की ऋण पुस्तिका गुम होने और उसकी दूसरी प्रति प्राप्त करने के लिए आवेदन देने की बात कही।इसके बाद कारोबारी को जमीन के दस्तावेजों और वास्तविक मालिक की पहचान को लेकर संदेह हुआ। जानकारी जुटाने पर पता चला कि जमीन के रिकॉर्ड में दर्ज मालिक के पिता का नाम बृजपाल सिंह है, जबकि सौदा करने वाले व्यक्ति के पिता का नाम डॉ. भानुप्रताप सिंह बताया गया था। इसके बाद कारोबारी को कथित धोखाधड़ी का संदेह हुआ और उसने पुलिस से शिकायत की।मंदिर हसौद पुलिस ने शुरू की जांचमामले की शिकायत मिलने के बाद मंदिर हसौद पुलिस ने आरोपित आदित्य प्रताप सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी और दस्तावेजों की कूटरचना से संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच के दौरान कथित फर्जी आधार कार्ड, जमीन के राजस्व रिकॉर्ड, इकरारनामा और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।फिलहाल, मामले में पुलिस की जांच जारी है। आरोपों की पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।











