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सरगुजा में पटवारी से मारपीट करने वाला भाजपा नेता जिला बदर, 6 जिलों में एक साल तक नो एंट्री

सरगुजा में पटवारी से मारपीट करने वाला भाजपा नेता जिला बदर, 6 जिलों में एक साल तक नो एंट्रीअंबिकापुर। सरगुजा जिले में पटवारी कार्यालय में घुसकर पटवारी और कंप्यूटर ऑपरेटर से मारपीट करने के मामले में प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। जिला दंडाधिकारी अजीत वसंत ने आरोपी भाजपा कार्यकर्ता जितेंद्र कुजूर उर्फ मोनू कुजूर को एक साल के लिए जिला बदर कर दिया है। इसके साथ ही उसे सरगुजा समेत कुल 6 जिलों की सीमा में प्रवेश करने पर प्रतिबंध लगाया गया है। पटवारी कार्यालय में घुसकर की थी मारपीटमामला 22 अप्रैल 2026 का है। आरोपी जितेंद्र कुजूर कंठी स्थित पटवारी कार्यालय पहुंचा था। वहां उसने राजस्व निरीक्षक के बारे में जानकारी मांगी। पटवारी प्रकाश मंडल ने बताया कि राजस्व निरीक्षक लंच के लिए गई हैं।इसके बाद आरोपी ने राजस्व निरीक्षक को फोन लगाने के लिए कहा। पटवारी ने कार्यालय की दीवार पर नंबर लिखे होने की जानकारी देते हुए खुद फोन लगाने को कहा। इसी बात पर आरोपी कथित तौर पर भड़क गया और पटवारी के साथ मारपीट शुरू कर दी। बीच-बचाव करने आए कंप्यूटर ऑपरेटर के साथ भी मारपीट की गई। बाहर भी पटवारी को पीटामारपीट से बचने के लिए पटवारी कार्यालय से बाहर निकले, लेकिन आरोपी ने उनका पीछा कर बाहर भी लात और डंडे से मारपीट की। पटवारी ने किसी तरह एक कमरे में पहुंचकर दरवाजा बंद किया और अपनी जान बचाई।घटना के बाद दरिमा पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया था। प्रशासन ने आरोपी को आदतन बदमाश मानते हुए अब जिला बदर की कार्रवाई की है। छह जिलों में प्रवेश पर प्रतिबंधवरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल ने आरोपी के खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई के लिए जिला दंडाधिकारी के न्यायालय में प्रतिवेदन प्रस्तुत किया था। इसके बाद आरोपी को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया।सुनवाई के बाद जिला दंडाधिकारी अजीत वसंत ने जितेंद्र कुजूर को एक वर्ष के लिए सरगुजा, जशपुर, रायगढ़, कोरबा, बलरामपुर और सूरजपुर जिले की सीमाओं से निष्कासित करने का आदेश जारी किया है। भाजपा से जुड़ा है आरोपीजितेंद्र कुजूर ग्राम सोहगा, दरिमा का रहने वाला है। वह फिटनेस ट्रेनर होने के साथ दरिमा मंडल में भाजपा का सक्रिय कार्यकर्ता बताया गया है। घटना के बाद भी भाजपा संगठन की ओर से उसे पद से हटाने संबंधी कोई सार्वजनिक बयान या पत्र सामने नहीं आया है। **प्रशासन की इस कार्रवाई को सरकारी कर्मचारियों के साथ मारपीट और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।**

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